बिहार का अनर्थशास्त्र ॥ - तर्कशील भारत

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Wednesday, October 25, 2017

बिहार का अनर्थशास्त्र ॥

 बिहार का अनर्थशास्त्र !!

बिहार में तीन ही चीजें हैं
जिनपर पूरे बिहार का अर्थशास्त्र खड़ा है 
वह है
ब्याह बच्चा और बिमारी 
कम उम्र में ब्याह
ब्याह की पूरी मार्किट तैयार
लड़का कैसा भी हो
बोली लगती है 
बीस हजार से
बीस लाख तक की 
मार्किट तैयार
शादी का सीजन 
साल में दो बार
आता है 
इसी सीजन में 
पूरे साल की 
कमाई हो जाती है 
गाडी वाले
टैंटवाले
और ब्याह करवाने वाले
ब्राह्मणों की चांदी ही चांदी !


फिर कम उम्र में ही बच्चा
बच्चा न हो तो
तो उसकी भी मार्किट है 
ओझा तंत्र मंत्र 
मनौती भखौति 
इन सभी प्रयोगों से 
पुत्र उत्त्पन्न हो जाए 
तो उसके बाद का अर्थशास्त्र भी कमाल का है
नामकरण मुंडन हकीका
चढ़ावा पूजा अठजाम लखराव 
यदि गलती से बेटी हो जाये
तो सारे अर्थशास्त्र पर 
पानी फेर देती है 
कलंकिनी...!


इसलिए
उसके होने से ख़ुशी कौन मनाये ?


गुड्डे गुड़िया की 
शादी का खेल 
खेलते खेलते 
कब इन नन्हें हाथों में 
मेहँदी लग जाती है 
पता नहीं
गुड़िया से खेलने वाली 
गुड़ियों के हाथ में 
शादी के कुछ ही साल में
सच मुच का 
खिलौना आ जाता है 
तब बचपना 
समाप्त हो जाता है
चौदह वर्ष की उम्र में 
एक परिपक्व माँ 
बनते उसे देर नहीं लगती
ऐसे में बच्चा बीमार हो जाये
तब 
बिमारी के अर्थशास्त्र 
का वह हिस्सा बन जाती है
खेत गिरवी रखना पड़ता है
डॉक्टर की फीस के लिए !


गहना 
साहूकार की तिजोरी में 
बंद हो जाता है 
यह सिलसिला 
तब तक चलता है
जब तक 
कोई औरत 
पांच या छः
बच्चों की माँ न बन जाये !


इतने बड़े परिवार को 
संभालना कोई खेल नहीं 
बिहार में रोजगार नहीं
खाये कहाँ से
बच्चो के लिए
अन्न लाये कहाँ से ?
खेती भी पैसा मांगती है
और अब तो 
बिहार के दरख्तों पर
फल की जगह 
नाउम्मीदी उगने लगी है
वे फल तो क्या
अब साया भी नहीं देते !


यही से शुरू होती है
पलायन की वह 
अंतहीन यात्रा
जिस पर 
बहुत से ठाकरे
एतराज करते हैं !


जब तक 
(B)बुद्ध के 
(B)बिहार में
(B)ब्राह्मणवाद रहेगा 
(B)ब्याह
(B)बच्चा
(B)बिमारी
का यह अर्थ शास्त्र यूँही चलता रहेगा !

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