क्या है पुनर्जन्म का सच ? - तर्कशील भारत

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Sunday, October 29, 2017

क्या है पुनर्जन्म का सच ?



ग़ालिब का एक शेर है "हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन दिल को बहलाने के लिये ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है" दिल को बहलाने के लिये पुनर्जन्म आत्मा परमात्मा जन्नत दोजख और क़यामत का ख्याल भी अच्छा है जब तक आपके इन सुन्दर खयालातों से आपका फायदा होता है । लेकिन दिल को बहलाने के लिए बनाये गए ये हसीन ख़यालात जब मानवता और कायनात के लिए सिरदर्द बन जाएं तब ये ख्यालात हसीन नहीं रहते बल्कि बदसूरत हो जाते हैं । अन्धविश्वाश और पाखंड किसी भी समाज के लिए कोढ़ के समान होते हैं जिसका इलाज है तार्किकता वैज्ञानिकता और मानवता । 
समाज में व्याप्त धार्मिक जहालत को दूर करने के लिए वैज्ञानिक जाग्रति आवश्यक है अन्धविषासों और अवैज्ञानिक बातों के पीछे छिपे असली वैज्ञानिक सत्य को सामने लाना ही हमारा मकसद है जिससे समाज में वैज्ञानिक चिंतन की संस्कृति पैदा हो सके ।


पुनर्जन्म क्या होता है ?

सभी धर्मों में अलग अलग रूपों में पुनर्जन्म की परिकल्पना की गई है । ईसाई यहूदी और इस्लाम में पुनर्जन्म की व्याख्या लगभग एक सामान है इन धर्मों में पुनर्जन्म की व्याख्या यह है कि सृस्टि के अंत के बाद किसी ख़ास दिन सभी प्राणियों को जीवित किया जायेगा और उनके कर्मों के अनुसार उन्हें न्याय मिलेगा । कोई जन्नत में जायेगा किसी को नर्क की यातना भुगतनी पड़ेगी ।
पुनर्जन्म की इस व्याख्या में मनुष्य की मृत्यु के बाद धरती पर मनुष्य के रूप में पुनः जन्म लेने कोई अवधारणा नहीं है इसलिए ईसाई या मुसलमानों में पुनर्जन्म की वैसी कहानियां प्रचिलित नहीं है जैसा की हमें उन संस्कृतियों में दिखाई देता है जिनमे मृत्यु के बाद फिर से पैदा होने की परिकल्पनाएं मौजूद हैं ।

भारत और अफ्रीका के कई देशों में पुनर्जन्म की अवधारणा पर विशवास किया जाता है । और समय समय पर इस तरह के कई मामले भी दिखाई और सुनाई देते जब कोई दावा करता है कि उसका पुनर्जन्म हुआ है और वह पिछले जन्म में अमुक व्यक्ति था । तो आइये आज हम मृत्यु के बाद के जीवन के रहस्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करते है ।

* क्या मृत्यु के बाद मनुष्य को फिर से जीवित किया जायेगा ?
* क़यामत के दिन मनुष्य के पापों का हिसाब होगा ?
* क्या इंसान की मृत्यु के बाद उसका फिर से जन्म हो सकता है ?
* जिन लोगों ने अपने पुनर्जन्म का दावा किया है उनका दावा कितना सही है ?

मनुष्य कोशिकाओं से बना है मां के गर्भ में प्रथम क्षण से ही उसके शरीर की कोशिकाएं विकसित होती है कोशिकाओं के विकास की यह प्रक्रिया उम्र भर चलती है मनुष्य के कोशिकाओं के विकास की प्रक्रिया को हम मनुष्य का विकास कहते हैं मनुष्य के जीवन में हर पल अरबों कोशिकाएं पैदा होती है और हर पल अरबों कोशिकाओं का नाश भी होता है जीवन की शुरुआत में कोशिकाओं के बनने की क्रिया कोशिकाओं के नष्ट होने की तुलना में तेज होती है जीवन के इस चक्र को बचपन कहा जाता है एक समय ऐसा भी आता है जब दोनों क्रियाएं एक सामान गति से चलती है जिसे जवानी कहा जाता है और फिर एक समय वो भी होता है जब नइ कोशिकाओं का बनना धीमा हो जाता है और पुराणी कोशिकाओं के नष्टिकरण की प्रक्रिया तेज हो जाती है इस प्रक्रिया को हम अधेड़ावस्था कहते है इसके बाद नई कोशिकाओं का बनना रुक जाता है और पुराणी कोशिकाओं का मरना तेज हो जाता है उस प्रक्रिया को हम बुढ़ापा कहते है । इसके बाद जब हमारी सभी कोशिकाओं का नाश हो जाता है उस प्रक्रिया को हम मृत्यु कहते है । अब बताइये की मृत्यु के बाद किसका पुनर्जम होगा ? मनुष्य का ? कौन से मनुष्य का ? मनुष्य का वजूद तो उसके जीवन भर पल प्रति पल पैदा होते और मरते खरबों कोशिकाओं पर टिका था तो पुनर्जन्म किसका ? मनुष्य को पुनः जीवित करने के लिए सबसे पहले उन खरबों कोशिकाओं को दुबारा जीवित करना होगा जिनसे उस मनुष्य का अस्तित्व बना था । इस हिसाब से मनुष्य को किसी क़यामत के दिन जिन्दा करने की कहानी झूठी और मनगढन्त साबित होती है ।

आत्मा के विषय में हजारों वर्ष पूर्व के भारतीय ऋषि आचार्य चार्वाक का कहना था कि "आत्मा और पुनर्जन्म की बाते लोगों को मूढ़ बनाने के लिए रची गई हैं " -- तथागत बुद्ध ने भी आत्मा और पुनर्जन्म  के अस्तित्व को नकार दिया था ।
क़यामत के दिन पुनः जीवित करने की अवधारणा पर कुरआन की यह आयत पूरी तरह पानी फेर देती है ।
"जीवन तो बस यही सांसारिक जीवन है हम मरते हैं जीते हैं और हम कभी उठाये जाने वाले नहीं" 
-कुरान 23/37
अब हम चलते हैं उन लोगों के पास जिन्होंने दावा किया था कि उनका पुनर्जन्म हुआ है । पुनर्जन्म की सबसे चर्चित कहानियों में से एक थी बिहार के नवलकिशोर की कहानी 9 वर्ष की आयु में ही यह बच्चा अपने पूर्व जन्म की बातें बताने लगा और उसका दवा था कि वो पिछले जन्म में पटना का मनोज था और उसकी पत्नी का नाम रेनू है उसका जमीनी विवाद में मर्डर कर दिया गया । इस खबर के पीछे का सच जाने बिना स्थानीय मीडिया ने इसे सनसनी बना दिया, बच्चे को लेकर उस गांव पहुचा गया जहाँ उसके बताये अनुसार वे सब बातें सच दिखाई दे रही थी , लेकिन एक महीने की सनसनी के बाद सच्चाई पर से पर्दा तब उठ गया जब उसने अपनी सास को चाची बताया ससुर को ताऊ और साले को पहचान ही नहीं पाया । बाद में पुनर्जन्म के इस झमेले की सच्चाई सामने आई तो सबके होश उड़ गए। उस बच्चे द्वारा उसके पुनर्जन्म के इस दावे से बहुत पहले से ही इस बच्चे का पिता रेणु से परिचित था । और पुनर्जन्म का यह बखेड़ा उन दोनों की योजना का हिस्सा था जिससे रेणु के पति की विवादित जमीन इन दोनों को मिल जाये ।

भूत प्रेत आत्मा परमात्मा पुनर्जन्म अलौकिक शक्ति इस प्रकार की सभी बातें झूठी और बेबुनियाद हैं । World rationalist society का चैलेंज है कि इन बातों को जो भी साबित कर देगा उसे यह संस्था 50 लाख डॉलर देगी और हैरानी की बात है कि आज तक कोई भी धर्मगुरु बाबा महंत या मुल्ला इस चुनौती को स्वीकार नहीं कर पाया है ।
भारत में हजारों ऐसे चमत्कारिक बाबा हैं लेकिन वे भी Rationalist Society Of INDIA की चुनौती को स्वीकार नहीं कर पाए ।

दुनिया भर के धार्मिक गिरोहों द्वारा फैलाई गई इस प्रकार की सभी बातें झूठी और बेबुनियाद हैं इन बातों का असली मकसद मनुष्य की सहज बुद्धि और विवेक को धर्म का मानसिक गुलाम बनाये रखना होता है जिससे मनुष्य का दूसरे मनुष्य द्वारा शोषण सरल हो सके ।
इसीलिए महान शहीद भगत सिंह कहते हैं "धर्म मनुष्यता का सबसे बड़ा शत्रु है"

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