तुमसे न हो पायेगा !! - तर्कशील भारत

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Thursday, April 20, 2017

तुमसे न हो पायेगा !!

तुमसे न हो पायेगा !!

कहते हो 
आतंक की जड़ तक जायेंगे
रहने दो 
हसीना 
यह तुम से न हो पायेगा
क्योंकि तुम 
एक औरत होने से पहले
एक इंसान होने से पहले 
एक मुसलमान हो !

आतंक की जड़ें 
कहाँ है 
यह तुम्हे पता है 
इसलिए 
झूठ मत बोलो
झूठी तसल्ली न दो
यूँ कहो की 
आतंकवाद से 
हम लड़ते रहेंगे
लड़ते रहेंगे
लड़ते रहेंगे
तब तक 
जब तक 
कुरआन और हदीसों 
के जाहिलाना फितूरों को
नई पीढ़ी की रगों में 
उढ़ेला जाता रहेगा !

आतंक की जड़ कहाँ है ?
तुम्हें पता है 
हमें भी पता है
उनको भी पता है
जो आतंक की 
खेती में लगे है !

आतंकवाद को मिटाना है 
तो इसके जड़ तक 
पहुंचना ही होगा
लेकिन पहुंचोगे कैसे ?

क्या उन शैतानी 
आयतों को 
मिटाने की हिम्मत 
तुममे हैं 
जो दहशतगर्दी को ,
आतंकवाद को
पैदा करती हैं ?

क्या मजहब के 
झंडाबरदारों की
आग उगलती
दस गज लंबी 
जुबान को
तुम काटकर 
फैंक सकती हो ?

क्या आतंक के ठेकेदारों 
की घिनौनी दाढ़ियों में
आग लगाने की हिम्मत 
तुम दिखा पाओगी ?

दहशतगर्दी की 
नर्सरियों को 
उखाड़ फेंकने की कुव्वत 
तुममें नहीं !

यह सब तुमसे न हो पायेगा
कभी नहीं
क्योंकि तुम
एक औरत होने से पहले
एक इंसान होने से पहले 
एक मुसलमान हो !

तुम नहीं मिटा सकते
कोई भी नहीं मिटा सकता 
यदि सच में मिटाना चाहते हो 
तो मजहब की फसलों को 
उगाना बंद करो
आतंक के घिनौने बीज को ,
खाद को 
नष्ट करो उन्हें जला दो
इतनी हिम्मत है तुममे ??

तस्लीमा 
तुम्हारी जगह होती
तो शायद 
वह कर सकती थी
क्योंकि
वह मुसलमान होने से पहले 
एक औरत है
और
एक औरत होने से पहले
एक इंसान है !

लेकिन तुम नहीं कर सकती
कभी नहीं
क्योंकि तुम 
एक औरत होने से पहले
एक इंसान होने से पहले 
एक मुसलमान हो !

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