क्या राम ने सबरी के जूठे बेर खाये ? - तर्कशील भारत

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Saturday, March 25, 2017

क्या राम ने सबरी के जूठे बेर खाये ?

कुछ लोग राम को सहिष्णु घोसित करने के लिए सबरी प्रकरण का हवाला देते हैं !
वाल्मीकि रामायण , अध्यात्म रामायण या किसी भी रामायण में "राम ने सबरी के जूठे बेर खाये" ऐसा नहीं लिखा है राम ने सबरी के यहाँ (जूठे नहीं) बेर खाये यह बात केवल तुलसी ने रामचरित मानस में लिखी है !

सबरी के आश्रम में पहुंचे श्रीराम का आथित्य स्वरुप सबरी ने बेर भेंट किये जिसे राम ने स्वीकार किया और मजे से खाया भी !
यह ठीक वैसे ही है जैसे राहुल गांधी दलितों के घर भोज करते हैं ऐसे भोज की खासियत यह होती है की इसमें नीच तो नीच ही रहता है लेकिन ऊंच और ऊँचा उठ कर महान हो जाता है !
राम को महान बनाने के लिए ही सबरी की जरुरत पड़ी वर्ना सबरी तो बुद्ध काल की एक व्यथित महिला थी भिक्षाटन के दौरान बुद्ध जब सुब्बा नाम की इस औरत के यहाँ से गुजरे तो उन्होंने सुब्बा से भिक्षा माँगा सुब्बा ने कहा मैं एक नीच कुल की औरत हूँ मेरे यहाँ खाकर आप अशुद्ध हो जायेंगे इस पर तथागत बुद्ध ने कहा की भूख का सम्बन्ध तो खाने से है इसमें नीच और ऊंच वाली बात कहाँ है ?
तब सुब्बा ने कहा की "मेरे पास अन्न नहीं है फिर भी आप चाहे तो मैं आपको बैर तोड़ कर खिला सकती हूँ "
बुद्ध ने सुब्बा के यहाँ भिक्षाटन में मिले बैर खाये और सुब्बा को भी खिलाया !
बुद्धकालीन जातक कथाओं के इसी प्रसंग को रामायण में राम को महान साबित करने के लिए डाल दिया गया !
यहाँ गौरतलब यह भी है की सुब्बा के नाम के साथ "री" जोड़ कर उसे नीच ही रखा गया है !


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