आओ ईश्वर को खोजें !! - तर्कशील भारत

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Saturday, March 25, 2017

आओ ईश्वर को खोजें !!


एक आस्तिक को 

भ्रम होता है की दुनिया उसके ईश्वर ने बनाई

एक नास्तिक 

पूरे आत्मविश्वास सेकहता है की 

दुनिया किसी ईश्वर नेनहीं बनाई



आस्तिक अपने खुदा को साबित करने के लिए

कुम्हार वाली पुरानी फिलॉसफी झाड़ता है

नास्तिक 

इस फिलॉसफी की धज्जियाँ उड़ाते हुए पूछता है 

की चलो मान लिया मिटटी के इंसान को



कुम्हार रूपी ईश्वर ने गढ़ा है 

तब उस ईश्वर को भी तो किसी ने गढ़ा होगा ?


ईश्वर को डार्विन से ज्यादा बुद्धिमान होना चाहिए

तब ही वह 

थ्योरी ऑफ़ नेचुरल सिलेक्शन को धता बताकर 

ओरिजिन ऑफ़ स्पीशीज़ से खुद को बाहर कर 

विकासवाद के सिद्धांतों के विरुद्ध 

खुद को स्थापित कर पायेगा

लेकिन स्वभावतः

ईश्वर अपने भक्तो से ज्यादा बुद्धिमान नहीं दिखता

निपट जाहिल मुर्ख अकर्मण्य और पाखंडी 

भक्त और बन्दों ने 

उसे भी अपने जैसा ही बना दिया है 

या निपट जाहिल मुर्ख अकर्मण्य

 और पाखंडी ईश्वर ने ही 

अपने भक्त और बन्दों को 

अपने जैसा बना दिया है


ग्रेविटी के न्यूटनकृत नियमों के विरुद्ध 

अंतरिक्ष में बिना किसी गुरुत्व के 

ईश्वर कहाँ रहता है ?

किसी स्वर्ग नामक अनजान ग्रह पर स्थित 

ईश्वर बिना ऑक्सीजन के कैसे रहता है ?

यदि उस ग्रह पर ऑक्सीजन है 

तब क्यों वैज्ञानिकों से इतनी मेहनत करवाता है ?

उसका ग्रह किस तारे की परिक्रमा करता है ?

ईश्वर का ग्रहपृथ्वी से 

कितने प्रकाशवर्ष की दुरी पर स्थित है ?

यदि कोई पृथ्वी पर 

संकटमय स्थिति में 

ईश्वर से मदद की गुहार लगाने के लिए 

आधुनिकतम उपकरणों का भी प्रयोग करता है 

और उसकी आवाज 

ईश्वर तक 

प्रकाश की गति 

यानि 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकण्ड के हिसाब से पहुंचाई जाती है 

और मान लो ईश्वर 

हमारी आकाशगंगा की 

सबसे करीबी आकाशगंगा 

एंड्रोमीडा के 

अरबों सूर्यों में से एक सूर्य का चक्कर लगाने वाले 

स्वर्ग नामक किसी ग्रह पर स्थित है 

तब हमारी प्रार्थना को उस तक पहुँचने में 

20 लाख साल लगेंगे 

क्योंकि एंड्रोमीडा गैलेक्सी हमसे 

20 लाख प्रकाशवर्ष की दुरी पर स्थित है 

अब या तो ईश्वर मुर्ख है 

या उसे मानने वाले उसके जैसे मुर्ख 

या फिर दोनों ही महामूर्ख !!

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